SSL क्या है? What is SSL in Hindi? यह कैसे कार्य करता है

दोस्तों! आइए जानते है SSL क्या है? और यह कैसे कार्य करता है? जब हम internet पर कुछ भी search करते हैं या किसी प्रकार का transection करते हैं तो एक सिक्योरिटी की जरूरत होती है जिससे हमारा data, email , account number, creditor debit card number जो भी fill किया गया है उसको attackers से बचाया जा सके तो client और web server के बीच की security को SSL कहते है।

SSL क्या है?(What is SSL in Hindi)

SSL का पूरा नाम secure socket layer है SSL browser और web server के बीच एक encrypted link स्थापित करता है यह link सुनिश्चित करती है कि web server और browser के बीच का सभी डेटा private और secure बना रहे। यह transport layer पर security provide करता है। Data safety इसका प्राथमिक उद्देश्य है। SSL Safe and secure internet connection provide करता है।

जो भी website SSL का उपयोग करते हैं उनका domain नाम जो होता है (जैसे www.alaghai.com) उसके साथ एक बंद ताले का चित्र जुड़ा हुआ होता है जो की हमारे Internet browser के URL में दिखता है और domain name के साथ http के जगह https लिखा रहता है, इससे पता चलता है कि वो website पूरी तरह से secure है।

History of SSL(इतिहास)

SSL को Netscape ने बनाया है और पहली बार 1995 मे इसका SSL version 2 launch हुआ था। SSL का version 1 कभी publish नही हुआ। इसके बाद 1999 में कुछ security को बड़ाकर SSL का version 3 launch हुआ इसका उपयोग काफी समय तक किया गया। फिर 2015 में IETF ( internet engineering task force) ने TLS ( transport layer security) को लाया।

SSL कैसे कार्य करता है?

User अपने browser से उस website के server को request send करता है की वो अपनी पहचान दे request देने के बाद web server अपने SSL certificate की कॉपी के साथ एक public key browser में send कर देता है।

उसके बाद user उस certificate को check करता है जिससे की user ये decide कर सके की वो उस website के साथ अपने private data को share करने के लिए उस पर trust कर सकता है या नहीं। check कर लेने के बाद जब user उस पर trust करने का फैसला कर लेता है तो फिर से वो उसके server को एक encrypt message भेजता है। फिर सर्वर उस encrypt data को decrypt करता है। इस तरह बीच में डाटा transmission चलता रहता है। और गोपनीय डाटा सुरक्षित रहता है।

Advantages / Features of SSL

1. Confidentiality : जो भी data communication के लिए exchange हो रहा है उस data को encrypted form में रखा जाता था। 

2. Authentication : जो user contact कर रहा है और जिससे contact हो रहा है वो दोनो सही person हो end to end communication ठीक हो ऐसा ना हो कि कोई third person बीच में आ जाए और आपका connection बेकार कर दे।

3. Reliability : जो भी message या information send की जा रही है वो उसी form में जाए ऐसा ना हो कि message का type change कर दिया हो।

4. Search Engine Optimization : हाल ही में Google ने घोषणा की थी कि SSL प्रमाणपत्र होना सर्च इंजन रैंकिंग को बढ़ावा देने वाले कारकों में से एक है। Algorithm इस तरह से बनाया गया है कि SSL certificate वाली साइटें search engine result page (SERP) में high rank देंगी। Google में high rank वाली लगभग सभी sites के पास SSL certificate होता है।

5. Software Requirements: SSL को client software को install करने की आवश्यकता नहीं होती है। केवल एक standard web browser के माध्यम से internet से जुड़ने की आवश्यकता है। इस प्रकार, software purchase, maintenance और management की cost को काफी बचाया जा सकता है। यह छोटे और बड़े दोनों type के organization के लिए beneficial हो सकता है।

6. Security : SSL certificate का major goal information’s को encrypt करना है ताकि इसे केवल intended recipients द्वारा ही पढ़ा जा सके। Internet के माध्यम से pass होने वाली information के third parties के हाथों में आने की संभावना अधिक होती है। चूंकि SSL certificate data को encrypt करता है, इसलिए उनमें random characters डाले जाते हैं। अगर intruders इन information को हासिल करने में भी सक्षम होंगे, तो भी वे उन्हें समझ नहीं पाएंगे। इस प्रकार, SSL User IDs, passwords and credit card numbers जैसी sensitive information’s की सुरक्षा के लिए इसे ideal बनाता है।

Disadvantages of SSL:

1. Performance : जब किसी साइट SSL certificate का उपयोग किया जाता है, तो transaction की speed काफी कम हो जाती है। ऐसा data के encryption और decryption के कारण होता है, इससे पहले कि इसका use किया जा सके।

2. Cost : SSL certificate purchase करना और establish करना काफी expensive हो सकता है। यह basically maintenance और  verification process के कारण है। हालाँकि कुछ hosting companies free SSL certificate प्रदान करती हैं, लेकिन आमतौर पर विभिन्न कारणों से इसकी recommendation नहीं की जाती है। Certificate के type के base पर cost different हो सकती है।

3. Expiry : कभी-कभी SSL certificate को renew करने की आवश्यकता होती है। यदि इसे समय-समय पर renews नहीं किया जाता है, तो यह बताते हुए popup message होगा कि SSL certificate expire हो गया है, जिसका अर्थ है कि site अब secure नहीं है।

4. Protocol Complications : यदि SSL certificate ठीक से implement नहीं किया गया है, तो HTTPS के माध्यम से प्रस्तुत की जाने वाली files HTTP के माध्यम से प्रस्तुत की जाएंगी। इसलिए, visitors को यह कहते हुए एक warning message display किया जाएगा कि उनका data secure नहीं है।

Website में SSL certificate कैसे लगाएँ: Steps 

SSL को अपनी website पर लगाना easy है। सामान्य तौर पर आपके नए SSL certificate को install करने के लिए 3 easy steps हैं –

1. एक विश्वसनीय CA द्वारा जारी certificate खरीदे –

विश्वसनीय certificates आपके web-host से खरीदे जा सकते हैं या अन्य विश्वसनीय CA से direct खरीदे जा सकते हैं। एक विश्वसनीय CA से certificate आपके visitors (Chrome, Firefox, internet explorer, Safari etc.) द्वारा उपयोग किए जाने वाले सभी लोकप्रिय internet browser द्वारा मान्यता प्राप्त होंगे।

2. Certificate को activate और install करें

यदि आपने अपने web-host से अपना certificate खरीदा है तो वे आपके लिए यह कदम उठा सकते हैं। यदि आप स्वयं site को manage कर रहे हैं, तो आपको जिन दो steps को पूरा करने की आवश्यकता है, उनमें से एक हैं एक certificate signing request (CSR) और उसके बाद अपना Certificate install करें।

3. अपनी पूरी site को HTTPS में बदलें–

अपने certificate को अपने target pages पर install करने के बाद, अपनी site को modify करें ताकि सभी content secure रूप से serve हो सके। Internet तेजी से हर page के लिए एक default HTTPS की ओर बढ़ रहा है, और यदि किसी वेबसाइट को HTTPS से अधिक सेवा दी जाती है, तो Google websites को बेहतर search ranking भी दे रहा है।

Leave a Comment