OSI Model क्या है- OSI Model in Hindi और इसकी सात लेयर्स

OSI Model in Hindi

इंटरनेट के आने से दुनियाँ से हमारा कम्युनिकेशन काफी तेजी से सम्पन्न हो पाया है। नेटवर्किंग के कारण Data Transfer, File Sharing, Messaging, Downloading, Uploading आदि जैसे कार्य सम्पन्न हो पाये है। परंतु क्या कभी आपने सोचा है जो डाटा या मैसेज आप किसी भी भेजते है, वह कैसे कार्य करता है? तो आइये हम इस लेख में जानते है कि ओएसआई(OSI) मॉडल क्या होता है और यह कैसे कार्य करता है। साथ ही OSI Model की 7 लेयर्स को भी गहराई से समझेंगे।

Page Content:

  1. OSI मॉडल क्या है?
  2. OSI मॉडल की 7 लेयर्स
  3. OSI मॉडल कैसे कार्य करता है

OSI मॉडल क्या है(What is OSI Model in Hindi)

OSI का पूरा नाम Open System Interconnect है, 1978 में ISO(इंटरनेशनल स्टैंडर्ड ऑर्गनाईजेशन) द्वारा नेटवर्किंग में data flow को समझने के लिए OSI मॉडल लाया गया था। OSI एक प्रकार का काल्पनिक framework है जो दो कम्प्युटर के मध्य डाटा कम्युनिकेशन के कुछ rules को define करता है। यह बताता है कि नेटवर्क पर डाटा कम्युनिकेशन कैसे होगा।

मान लीजिये कम्प्युटर-A और कम्प्युटर B के बीच नेटवर्क पर डाटा ट्रान्सफर हो रहा है जिसमें कम्प्युटर-A अपनी ओर से 8 bit के डाटा को सेंड करता है, परंतु वहीं कम्प्युटर-B केवल 16 bit के डाटा packets को स्वीकार करता है। इस तरह कम्प्युटरों के बीच डाटा transmission कभी संभव नहीं हो पाता। इसलिए OSI मॉडल के कान्सैप्ट को लाया गया, जो यह निर्धारित करता है कि जब दो या दो से अधिक कम्प्युटर नेटवर्क पर डाटा कम्युनिकेशन करते है तो कुछ स्टैंडर्ड/रूल्स को ध्यान में रखा जाए।

आजकल उपयोग किए जाने वाले सभी नेटवर्क कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल जैसे HTTP, TCP, DHCP, FTP आदि सभी OSI मॉडल पर आधारित है। ओ.एस.आई. मॉडल में data communication के लिए सात(7) लेयर्स है जो नेटवर्क से जुड़े कम्प्युटरों के बीच सूचना आदान-प्रदान के लिए छोटे-छोटे सात कार्यों को सम्पन्न करता है।

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OSI मॉडल की सात लेयर्स

ओपन सिस्टम इंटरकनैक्ट मॉडल में 7 लेयर्स होती है जिससे नेटवर्क डाटा ट्रान्सफर के कार्य को आसानी से मैनेज किया जा सके। सात ओएसआई लेयरों में से प्रत्येक के कुछ कार्य होते है जो जिससे ये बिना एक-दूसरे को प्रभावित किए बिना डेटा को एक node से दूसरी node तक safely transmit कर सके। OSI मॉडल में निम्न सात लेयर्स है:

  1. Physical Layer
  2. Data Link Layer
  3. Network Layer
  4. Transport Layer
  5. Session Layer
  6. Presentation Layer
  7. Application Layer

OSI Model 7 Layers

OSI model की सात लेयरों को दो समूहों में बाँटा जा गया है (1)Upper Layer जिसमें Application, Presentation, Session लेयर्स शामिल है. (2)Lower Layer जिसमें Transport, Network, Data Link, Physical लेयरों को रखा गया है। OSI मॉडल की upper layer एप्लिकेशन संबन्धित कार्यों को देखती है यह केवल सॉफ्टवेयर द्वारा ही ऑपरेट की जाती है। Lower layer मॉडल में डाटा ट्रांसपोर्ट को देखती है। आइए अब सभी सातों लेयर्स और उनके कार्यों को समझते है:-

1.Physical Layer

डेटा ट्रान्सफर में केबल्स, कनेक्टर, वोल्टेज,हब, रिपीटर, टोपोलोजी आदि सभी Physical लेयर के अंतर्गत आते है। यह मीडिया सिगनल और बिइनरी ट्रांसमिशन के लिए जिम्मेदार होती है। इसमें डाटा Bits के रूप में रहता है। इस लेयर में माप की इकाई Kbps, Mbms or Gbps में होती है।

कार्य:

  • सेंडर और रिसीवर के बीच डाटा ट्रान्सफर के लिए कम्युनिकेशन मीडियम स्थापित करता है।
  • नेटवर्क मीडियम(वायर्ड or वायरलेस) और डिवाइस(सेंडर or रिसीवर) के बीच इंटरफ़ेस को define करती है।

2.Data Link Layer

यह OSI मॉडल की दूसरी लेयर है, इस लेयर के लिए NIC कार्ड, Bridges, Switches उपयोग होते है। यह लेयर दो हार्डवेयर डिवाइस के बीच डाटा ट्रंजमिशन को कनैक्ट/कंट्रोल करता है। इसमें डाटा कम्युनिकेशन NIC कार्ड के MAC Address द्वारा होता है। DLL में माप की इकाई frame होती है। 

डाटा लिंक लेयर की दो सब-लेयर होती है:→

(a)Logical Link Control(LLC) मल्टीस्पेसिंग तंत्र प्रदान करता है, जो एक समय में होने वाले कई नेटवर्क प्रोटोकॉल(IP, IPx, DECnet) को एक नेटवर्क मीडिया में लेकर आता है और Error चेक करता है।

(b)Media Access Control(MAC) किसी नेटवर्क के node को एड्रैस और चैनल एक्सैस कंट्रोल प्रदान करता है।

कार्य:

  • फ़िज़िकल एड्रेससिंग, फ्रेमिंग, फ्लो कंट्रोल, Error detection करती है।
  • डाटा पैकेट्स ट्रांसमिशन में में error का पता लगाना और सुधार करना।

3.Netwrok Layer

यह लेयर लॉजिकल अड्रेसिंग और राऊटिंग फंक्शन के उपयोग के द्वारा डिवाइस के बीच डाटा कैसे move होगा यह निर्धारित करती है। इसमें हार्डवेयर के तौर पर राउटर का प्रयोग होता है। इन लेयर में निम्न प्रोटोकॉल शामिल है IPv4, IPv6, IPX, RIP, ICMP, IGMP आदि। नेटवर्क लेयर में डेटा की माप packet में की जाती है। 

कार्य:

  • Routing: यह सेंडर से रिसीवर तक डेटा transmit करने का सबसे छोटा रास्ता ढूँढता है।
  • Data Travel के लिए सबसे सुरक्षित  रास्ते को चुनना नेटवर्क लेयर का काम है।

4.Transport Layer

यह नेटवर्क लेयर के साथ मिलकर end users तक कम्युनिकेशन स्थापित करती है। अपने ऊपर वाली सभी लेयर में Error फ्री डेटा ट्रांसमिशन को संभालने के लिए ट्रांसपोर्ट लेयर होती है। डेटा माप segment के रूप में की जाती है। इस लेयर में TCP, UDP आदि प्रोटोकॉल उपयोग होते है।

कार्य:

  • शुरू से अंत तक कम्प्युटरों के बीच error free ट्रांसमिशन को सुनिश्चित करता है।
  • Error Correction और flow कंट्रोल फ्रेम से accurate डाटा पैकेट भेजता है।

5.Session Layer

नेटवर्क और यूजर एप्लिकेशन के बीच कनैक्शन स्थापित करती है। सेंडर और रिसीवर end पर यूजर सेशन को कंट्रोल किया जाता है। इस लेयर में उपयोग होने वाले प्रोटोकॉल NetBIOS, PAP, PPTP, L2TP आदि शामिल है।

कार्य:

  • User Session और डायलोग(Logon/Logoff को संभालता है)
  • End यूजर्स के बीच सिंक्रोनाइजिंग का कार्य करता है।
  • सभी लेयर्स में होने वाली error की रिपोर्ट बताता है।

6.Presentation Layer

प्रजेंटेशन लेयर डेटा को उस फॉर्मेट में कन्वर्ट करता जिसे रिसीवर end पर सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन समझ सके। इसमें उपयोग किए जाने वाले प्रोटोकॉल ACSII, EBCDIC, MIDI, SSL, TLS आदि है।

कार्य:

  • यह लेयर डेटा Encrypt/Decrypt, Encode/Decode, Compression/Decompression आदि के लिए जिम्मेदार है।
  • अलग-अलग डाटा पैकेट्स के स्वतंत्र ट्रान्सफर के लिए विशेष आर्किटेक्चर प्रदान करता है।

7.Application Layer

यह लेयर OSI मॉडल की 7th और आखिरी लेयर है, यह लेयर किसी end user जिसे डाटा प्राप्त होता है उसके सबसे करीब होती है। यह users को एक meaningful डेटा प्रजेंट करता है, जैसे HTTP(हाइपर टेक्स्ट ट्रान्सफर प्रोटोकॉल), FTP(फ़ाइल ट्रान्सफर प्रोटोकॉल), SMTP आदि। उदाहरण- आप जब कोई वैबसाइट विसिट करते है तो यह लेयर HTTP पप्रोटोकॉल को स्टार्ट कर देती है, हो सर्वर के HTTP के साथ communicate करके कनैक्शन स्थापित करता है।

कार्य:

  • एंड यूजर को वेब ब्राउज़िंग, ईमेल, फ़ाइल ट्रान्सफर जैसे फीचर्स प्रदान करता है।
  • नेटवर्क पर उपयोगकर्ताओं के लिए इंटरफ़ेस प्रदान करती है।

OSI मॉडल कैसे कार्य करता है(Data Flow in OSI Model)

ओ.एस.आई. मॉडल में डाटा प्रवाह दो प्रकार से होता है, पहला डाउन(Data Encapsulation) और दूसरा अप(Data Decapsulation). यदि कोई डेटा एक कम्प्युटर से दूसरे कम्प्युटर पर भेजना चाहता है तो ओएसआई मॉडल सुनिश्चित करता है कि दोनों कम्प्युटर सभी स्टैंडर्ड/rules को फॉलो करें।  जब OSI मॉडल में डाटा नीचे की ओर फ्लो होता है तो हर लेयर header क्रिएट करती है इसे Data-Encapsulation कहते है। header किसी डाटा पैकेट के बारें में इन्फॉर्मेशन स्टोर करने का कार्य करता है। और जब डाटा का फ्लो ऊपर की ओर होता है उसी लेयर  द्वारा header को हटा दिया जाता है इसे Data- Decapsulation कहा जाता है। हर लेयर खुद का एक अलग header बनाती करती है।

ट्रान्सफर की प्रोसैस डेटा को Application Layer में भेजती है, यह लेयर डेटा पर एप्लिकेशन हैडर जोड़ती है इससे एक फ्रेम तैयार होता है। फिर इस फ्रेम को Presentation Layer में भेजा जाता है। यह हैडर जोड़ने की प्रक्रिया प्रत्येक लेयर में तब तक दोहराई जाती है जब तक कि frame, Data Link Layer तक ना पहुँच जाए।

Data Flow in OSI Model

Data Link Layer में हैडर के साथ Data Link Trailer भी जोड़ा जाता है, यह डाटा में error detection का काम करता है। डाटा लिंक ट्रेलर के साथ checksum और padding होता है ये डाटा की accuracy को कन्फ़र्म करते है। इसके बाद फ्रेम को Physical Layer में भेजा जाता है यहाँ से यह Receiver Computer में भेज दिया जाता है।

Receiver Computer पर प्रत्येक लेयर द्वारा एक-एक करके header और data trailer को हटा दिया जाता है। और अपनी ऊपरी लेयर को भेजे जाते है जब तक की डाटा के पैकेट्स प्राप्त ना हो जाए। 

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